Saturday, 20 February 2016

अमृत, विष, वीर भोग्य वसुधंरा के बीच का नाटक

देश में समुन्द्र मंथन चल रहा है छुपा जहर बाहर आ रहा है शीघ्र ही " अमृत " का स्वाद चखने का अवसर प्राप्त होगा...


जहर:- जेएनयू, कामरेड, कांग्रेस, आआप, (चलो आरक्षण भी जोड़ लेते हैं), अंबेडकरवादी, रविश कुमार, आजतक, एनडीटीवी,......... वो अंग्रेजी मे क्या कहते हैं ब्ला-२।


अब आते हैं अमृत पे खैर जब पाप व जहर का घड़ा हद से ज्यादा भर जाए तो धर्म युद्ध भी आवश्यक है, तो "वीर भोग्य वसुंधरा"
अब इतना बड़ा शब्द बोल दिया है मैनें तो ये भी बता दूँ कि आजकल की लगभग नंपुसक पीढ़ी.से ये उम्मीद भी नही करता मैं ,

वो तो क्या कहते हैं उसे कम्फर्ट जोन मे हैं, एक हमारे सहकर्मी है वो बड़ी शान से कहते हैं "I, me, Myself", अजी घंटा जब आप फिर गुलाम हो जाओगे तब करते रहना मेरा-२।


अब थोड़ा सा विचित्र मोड़, जब मैं छोटा था तो महाभारत नाम का एक प्रोग्राम आता था तो उसके उपसंहार मे हमेशा एक गाना आता था 

"सीख हम बीते युंगो से नए युग का करें स्वागत"

तो भैया इस कामरेड, मैकाले वाद, नंपुसक पीढ़ी ने एक ज़बरदस्त मतलब निकाला की दुर्योधन तो मूर्ख था अब हम बताते हैं कैसे करना है भैया हम तो महाभारत हार गए अब शिखा विहीन करके समाज से निकाले जा रहें है तो ऐसा करते हैं ये जो धर्म प्राय महान युधिष्ठिर हैं इससे थोड़ी जगह मांगते है और लोकतंत्र का युधिष्ठिर उसने दे दिया तो अब भैया जहर भरो इनकी जनता में और जनता (इसमे कन्हैया डाल देता हूँ क्यूँकि किसी पक्षधर के अनुसार भटका है) भटकी है भोली है जल्दी इधर -उधर हो जाती है और आज का युधिष्ठिर मतलब लोकतंत्र का महानायक दुनिया मे देश की नींव मजबूत करने मे लगा है। तो भैया महानायक पहले अंदर का कचरा तो साफ कर लो आँखो का सूरमा हटाओ जरा और तनिक इस लोकतांत्रिक देश के अंदर के जयचंद और मूर्ख लोगों से निपटों, सत्ता मे हो पूरे बहुमत से हो कठोर निर्णय लेने का समय है तभी अमृत मिलेगा नही तो आंतरिक चोट नासूर बन जाती है और लाइलाज अंग को काटना ही पड़ता है।


भैया अपना काम था ज्ञान देना आपका काम है लेना तो जिसको जितना लेना है ले ले बाकि हमारा लेख समाप्त।
#वीर_भोग्य_वसुंधरा
#जय_हिन्द

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