अपने देश में बकचोदों की बढ़ती संख्या, समाज में उनके महत्त्व, देश की अर्थव्यवस्था, राजनीति आदि में उनके अमूल्य और अपरिहार्य योगदान को देखते हुए यह समीचीन रहेगा कि सरकार अलग से बकचोद मंत्रालय स्थापित करे, क्यूँकि बकचोदी की कला अब चाय की दुकानो से उठकर कॉमेडी शोज के रूप में पूर्णतः सामाजिक हो चुकी है। अब तो बड़े-२ कलाकार भी अपनी प्रतिष्ठा बढाने के लिए बकचोदी वाले कार्यक्रम करके जनता के पैसे का चूतिया काट रहें हैं।
लोग पूछेंगे कि बकचोद मंत्रालय बनने से शासन और समाज को क्या लाभ होगा? तो हमारा मंतव्य है कि बकचोदों के पंजीकरण और विनियमन से शासन को कम से कम यह तो पता रहेगा कि अमुक-अमुक इलाके में और अमुक-अमुक कोटि-कैटेगरी के इतने बकचोद यहाँ-यहाँ हैं, इस कॉमेडी शो मे इतने बकचोद फलाँ-२ कैटेगिरी मे प्रतिष्ठित हैं, ट्वीटर पे इतने फेसबुक पे इतने, चाय की दुकान में इस प्रकार के हैं। मंत्रालय की वेबसाइट पर बड़े-२ बकचोद लोगों के ब्यौरे होंगे।
तब देश के जिस नागरिक को जो सुविधा या सेवा चाहिए होगी, या जिस बकचोदी से निजात पानी होगी वह उसके अनुरूप बकचोदों की जानकारी वेबसाइट से ही पा लेगा। अभी तो बकचोदों का सारा कारोबार बसों, चाय की दुकानों,या सार्वजनिक मूत्रालयों में चस्पा पैंफलेटों के ज़रिए, सोशल मिडिया और थोड़ा बहुत कॉमेडी शो और चेलों-चपाटों की जबानी किए गए प्रचार के भरोसे चलता है। तब बकचोदों को भी फायदा, लोगो को बकचोदी का ज्ञान ओर देश की सरकार को चूतिया बनाने के वक्तव्य, मतलब एक ही मघ्घे से तीन गाँड धुल जाएँगी...
अपने देश के अनपढ़ और गंवार लोग ही नहीं, लोडें लफाड़ी ही नही बल्कि बड़े-बड़े नेता, कलाकार, मंत्री, अधिकारी आदि भी बकचोद हैं या बकचोदों की चरण-रज लेने जाते हैं। यह तो पक्का है कि ऐसा करने से समाज के इन शिरोमणियों का कल्याण होता है, नहीं तो बकचोदी अचानक से प्रतिष्ठावान हो जाती और बकचोदों की इतनी पूछ क्यों होती? एक बार जब बकचोद मंत्रालय बन जाएगा, तो ऐसे समाज-शिरोमणि लोग मंत्रालय में ही अलग से बकचोदी कॉन्क्लेव बनवा सकते हैं और ज़रूरत के अनुसार, बिना कोई समय गँवाए अपना उल्लू सीधा करने के लिए बकचोदी के चरणों की भभूत अपने माथे पर लगाकर मनचाहे तरीके से सामने वाले को बातों मे घेरकर चूतिया काट सकतें हैं।
अब मैं भी सोच रहा हूँ कि किसी बड़े बकचोद के शरणार्थ होकर "अथातो बकचोदी जिज्ञासा" पूरी करके अपने स्वार्थों को यहीं हिल्ले लगाऊँ...
लोग पूछेंगे कि बकचोद मंत्रालय बनने से शासन और समाज को क्या लाभ होगा? तो हमारा मंतव्य है कि बकचोदों के पंजीकरण और विनियमन से शासन को कम से कम यह तो पता रहेगा कि अमुक-अमुक इलाके में और अमुक-अमुक कोटि-कैटेगरी के इतने बकचोद यहाँ-यहाँ हैं, इस कॉमेडी शो मे इतने बकचोद फलाँ-२ कैटेगिरी मे प्रतिष्ठित हैं, ट्वीटर पे इतने फेसबुक पे इतने, चाय की दुकान में इस प्रकार के हैं। मंत्रालय की वेबसाइट पर बड़े-२ बकचोद लोगों के ब्यौरे होंगे।
तब देश के जिस नागरिक को जो सुविधा या सेवा चाहिए होगी, या जिस बकचोदी से निजात पानी होगी वह उसके अनुरूप बकचोदों की जानकारी वेबसाइट से ही पा लेगा। अभी तो बकचोदों का सारा कारोबार बसों, चाय की दुकानों,या सार्वजनिक मूत्रालयों में चस्पा पैंफलेटों के ज़रिए, सोशल मिडिया और थोड़ा बहुत कॉमेडी शो और चेलों-चपाटों की जबानी किए गए प्रचार के भरोसे चलता है। तब बकचोदों को भी फायदा, लोगो को बकचोदी का ज्ञान ओर देश की सरकार को चूतिया बनाने के वक्तव्य, मतलब एक ही मघ्घे से तीन गाँड धुल जाएँगी...
अपने देश के अनपढ़ और गंवार लोग ही नहीं, लोडें लफाड़ी ही नही बल्कि बड़े-बड़े नेता, कलाकार, मंत्री, अधिकारी आदि भी बकचोद हैं या बकचोदों की चरण-रज लेने जाते हैं। यह तो पक्का है कि ऐसा करने से समाज के इन शिरोमणियों का कल्याण होता है, नहीं तो बकचोदी अचानक से प्रतिष्ठावान हो जाती और बकचोदों की इतनी पूछ क्यों होती? एक बार जब बकचोद मंत्रालय बन जाएगा, तो ऐसे समाज-शिरोमणि लोग मंत्रालय में ही अलग से बकचोदी कॉन्क्लेव बनवा सकते हैं और ज़रूरत के अनुसार, बिना कोई समय गँवाए अपना उल्लू सीधा करने के लिए बकचोदी के चरणों की भभूत अपने माथे पर लगाकर मनचाहे तरीके से सामने वाले को बातों मे घेरकर चूतिया काट सकतें हैं।
अब मैं भी सोच रहा हूँ कि किसी बड़े बकचोद के शरणार्थ होकर "अथातो बकचोदी जिज्ञासा" पूरी करके अपने स्वार्थों को यहीं हिल्ले लगाऊँ...
Lekhak ne bahut sahi baat kahi hai. Mantralya mei bill paas nahi hote mantriyo ki bakkar se aur desh ko nuksaan ho raha hai.
ReplyDeleteमैं भी सोच रहा हूँ कि किसी बड़े बकर के शरणार्थ हूँ बकर की देश को आवश्यकता है, आप साथ आएँगें??
Deleteप्रशंसा के लिए हुदय से आभार !!
bahuttai krantikari vichaar hai. Ise 'CC' kejiye Modi ji ko ;)
ReplyDeleteSure dude...:)
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