Monday, 29 June 2015

मेरा ककवारा...

नीम का पेड़

छोटे -छोटे शालिग्राम

कुएँ का ठंडा पानी

और पीपल की नरम छाँह

सुबह का कलेवा

'अग्गा राजा दुग्गा दरोगा'


गन्ने का रस और दही

साथ में आलू की सलोनी

गेरू और चूने से

लिपे-पुते घर में

आँगन और तुलसी

दरवाज़े की देहरी

ताख में रखा दिया

उजास का पहरिया

बाबा की झोपड़ी

और मानस की पोथी

लौकी की बेलें

छप्पर पर आँख-मिचौनी खेलें


आमो का झूरना

महुए का बीनना

अधपके गेहू की बाली का चूसना

बगल के बाँसों की

बजती बाँसुरी

खेत-खलिहान में काम करते

बैल हमारे परिवार के

और पास में चरते गोरू-बछेरू घर के


प्री-टेक्निक युग की खुदाई में

मिली ये सारी वस्तुएँ

जिनको मैंने खोया था

कई बरस पहले

कई बरस पहले.....

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